# आख़िरी संदेश
किया था जो वादा एक माँ से वतन के लिए,
छोड़ आया मैं घर उस माँ के वचन के लिए।
मुट्ठी में है साँस और आँखो मे तिरंगा,
मैंने बस जिया तो तीन रंग के कफ़न के लिए।
***आख़िरी संदेश,***
मेरी मुट्ठी मे मेरी साँस हैं,
मेरे आगे सैकड़ों लाश हैं।
सरहद पे आज खड़ा हूँ,
इस मिट्टी के लिए मैं लड़ रहा हूँ।
अंदर की लौ को मत बुझने देना,
हौसलों को कभी मत टूटने देना।
ये सौगंध तुम्हें है इस जवान की,
मेरी माँ मेरे हिंदुस्तान की,
मेरी माँ मेरे हिंदुस्तान की।
इक माँ बैठी है आस में,
उसकी निगाहे है मेरी तलाश में।
इक बच्ची जो राह देखती है,
पिता के लिए वो बिलखती है।
मै दूर हूँ अपने परिवार से,
मेरे घर मेरे अपने द्वार से।
इस मिट्टी का मुझे गुमान हैं,
ये देश ही मेरा स्वाभिमान हैं।
ये देश ही मेरी स्वाभिमान हैं।
मेरा इश्क़ बैठा है इंतज़ार में,
अपने महबूब के एक दीदार में।
गाँव की गलियों में कभी ताकती है,
तो हर शाम खिड़कियों से झांकती है,
मै रात तन्हाई में गुज़ारता हूँ,
उसकी यादों में आहें भरता हूँ।
पर मेरा दिल आज भी नादान हैं,
मेरा इश्क़ तो सिर्फ़ हिंदुस्तान हैं।
मेरा इश्क़ तो सिर्फ़ हिंदुस्तान हैं।
वो बर्फ़ की चादर ओढ़ी हुयी,
अंदर आग में जलती हुयी।
खूबसूरत जैसे कोई तस्वीर है,
ये भारत का हिस्सा कश्मीर है।
फिर मज़हब की कैसी लड़ाई यहाँ,
क्यों बहती है खून कि स्याही यहाँ।
मेरे भाई इस मिट्टी पे मैं कुरबान हूँ,
मै हिंदू नहीं मुसलमान हूँ।
मै हिंदू नहीं मुसलमान हूँ।
अब मैदान-ए-जंग में उतर रहा हूँ,
गोलियों और बारूदों से गुजर रहा हूँ।
किसी सुहागन का सिंदूर मिट जाए अगर,
कोई फ़ौजी तिरंगे में लिपट जाए अगर।
भारत माँ को कभी मत झुकने देना,
अपने कदम को कभी मत रुकने देना।
ये आज़ादी जवानो का बलिदान हैं,
तब जाके बना हिंदुस्तान हैं,
तब जाके बना हिंदुस्तान हैं।
है सन्नाटा अब यहाँ अब समा ख़ामोश हैं,
मेरे दोस्त मेरे भाई क्यों दिख रहे बेहोश हैं।
लहरा रहा तिरंगा उस पर्वत की ऊँचाई पर,
जलते हुए दीये में ज़िंदा अभी भी आक्रोश हैं।
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