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# क्या है अनंत सूत्र की 14 गाठों का महत्व और नियम
आज हम आपको बताने वाले हैं कि अनंत चतुर्दशी पर बांधे जाने वाले, चौदह गांठों वाले अनंत सूत्र से आपके जीवन में कितना कुछ बदल सकता है।
भगवान अनंत, श्री हरि विष्णु का अवतार हैं, इसलिए भगवान विष्णु से सुख-शांति और समृद्धि का आशीष पाने के लिए अनंत चतुर्दशी का व्रत किया जाता है, तथा अनंत सूत्र को कलाई पर बांधा जाता है।
भगवान विष्णु ने सृष्टि की रचना के समय भौतिक जगत में इन चौदह लोक को रचा था, जिनके नाम कुछ इस प्रकार है - भू, भुवः, स्वः, महः, जन, तप, ब्रह्म, अतल, वितल, सतल, रसातल, तलातल, महातल और पाताल। ऐसी मान्यता है कि अनंत सूत्र में बाँधी गई चौदह गांठे इन्हीं चौदह लोकों का प्रतीक है।
इन चौदह लोकों का पालन करने के लिए भगवान विष्णु 14 रूपों में प्रकट हुए। यह 14 रूप एक साथ अंतहीन प्रतीत हो रहे थे, इसलिए विष्णु जी के इस रूप को अनंत का नाम मिला।
इस प्रकार अनंत धागे को कलाई पर बांधने से और अनंत चतुर्दशी का विधिपूर्वक व्रत करने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति होती है। सिर्फ इस एक सूत्र के प्रभाव से आपके जीवन से हर तरह की बाधाएं और सभी नकारात्मक प्रभाव दूर हो जाते हैं।
अनंत सूत्र को अपनी कलाई पर धारण करने से पहले कुछ बातों का ध्यान जरूर रखें जैसे कि आप इस व्रत की पूजा विधि करने के बाद ही अनंत सूत्र को धारण करें। सूत्र बांधने से पहले इसे कच्चे दूध में डुबोकर भगवान विष्णु के सामने या पूजास्थल पर रखें। सूत्र को कलाई पर बांधते समय भगवान अनंत का ध्यान करते रहें साथ ही मन ही मन में **“ॐ अनन्ताय नमः”** मंत्र का जाप करते रहें।
पुरुष इस सूत्र को दाहिने हाथ पर बांधे, और महिलाएं इसे अपनी बाईं कलाई पर बांधे। अनंत सूत्र को पूरे एक साल तक अर्थात अगली अनंत चतुर्दशी तक धारण करने का नियम है, लेकिन अगर आप इसे एक साल तक बांधकर रखने में असमर्थ हैं, तो कम से कम इसे 14 दिनों तक बांधें और उसके बाद इसे विसर्जित करें।
इस धागे को गलती से भी तोड़ें या काटें नहीं। इसे खोलकर विसर्जित करें। कथा के अनुसार ऋषि कौडिन्य ने अपनी पत्नी सुशीला के हाथ से अनंत सूत्र को तोड़कर आग में जला दिया था, जिसकी वजह से उन्होंने अपना सारा वैभव खो दिया था। अनंत सूत्र को पहने रखने तक मांस-मदिरा का सेवन न करें।
किसी भी कच्चे या रेशम के धागे को कुमकुम या हल्दी से रंग कर उससे बनाये गए इस अनंत सूत्र में आपकी मनोकामनाओं को पूरा करने की शक्ति होती है। इस अनंत चतुर्दशी पर श्रीमंदिर के साथ चतुर्दशी की पूजा में भाग लीजिये और श्री हरि विष्णु का आशीर्वाद पाएं।