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# ऋषि पंचमी पर कैसे करें विधिपूर्वक पूजा
प्रतिवर्ष भाद्रपद महीने में, शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को ऋषि पंचमी का व्रत रखा जाता है। इस दिन सप्त ऋर्षियों की पूजा, विधि-विधान पूर्वक संपन्न किये जाने की प्रथा है।
यह व्रत, महिलाएं सप्त ऋषि का आशीर्वाद प्राप्त करने और सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना के लिये रखती हैं। आज इसी ऋषि पंचमी की पूजा संपन्न करने में आपकी सहायता हेतु, हम ऋषि पंचमी की पूजा विधि लेकर आए हैं।
आपको बता दें, कि इस पूजा को करने का तरीका काफ़ी ख़ास होता है। इसमें सप्त ऋषियों के साथ, अरुंधति माता की पूजा की जाती है।
**तो चलिए जानते हैं, कि कैसे की जाएगी सप्त ऋषियों और माता की पूजा।**
सबसे पहले इस पूजा में इस्तेमाल की जाने वाली समस्त पूजन सामग्री को पूजा करने से पहले ही एकत्रित कर लें।
* रोली, मौली, अक्षत, हल्दी, अगरबत्ती, दीप, धूप, कलश, नारियल, समा के चावल, सोलह सृगार का समान, दूध, आसन, भगवान गणेश और माता गौरी की मूर्ति, मिष्ठान, कुमकुम, चंदन, पुष्प एवं पुष्पमाला, जल से भरा लोटा, केला, सेब, पूजा की सुपारी, सूखे मेवे जैसे की काजू आदि।
* ऋषि पंचमी का व्रत रखने वाली महिलाएं, प्रात:काल स्नान आदि कार्यों से निवृत होकर घर में चौकोर आसन के ऊपर पीले रंग का कपड़ा बिछा ले।
* फिर उसमें समा के चावल से आठ पुंज बनाए।
* विधि के अनुसार, सात पुंज ऋषियों के लिये और एक माता के लिए होगा।
* इसके पश्चात, पूजा के लिए उपयोग में आने वाली सुपारी का इस्तेमाल कर के उपर्युक्त सप्त ऋषियों की स्थापना करें।
* आप चाहें, तो भगवान गणेश और माता गौरी के लिये भी पुंज बनाकर साथ में पूजा की जा सकती है।
* इसके साथ ही, आप एक कलश की स्थापना भी करें, जो पूजा में उपयोग होगा।
**चलिए जानते हैं कलश की स्थापना के बाद क्या करें-**
* सभी पुंजों को जल या दूध से स्नान करवाएं।
* फिर सप्त ऋषियों एवं गणेश जी को चंदन का तिलक लगाएं।
* इसके बाद माता गौरी और माता अरुंधति को रोली का टीका लगाये।
* तत्पश्चात्, सभी को कलावा, पुष्प, माला और अक्षत चढ़ाने के साथ ही, सभी ऋषियों को जनेऊ पहनाएं।
* आप चाहें, तो श्वेताम्बरी वस्त्र भी अर्पित कर सकते हैं।
* अब माता गौरी और माता अरुंधति को सोलह श्रृंगार अर्पित करें।
* किसी भी पूजा में भोग का विशेष महत्व होता है, इसलिए, भोग के रूप में सूखे मेवे जैसे छुहारा और काजू।
* साथ ही फल एवं मिष्ठान आदि भी चढ़ाएं।
अब आप प्रेम और भक्ति समेत, अगरबत्ती, धूप, दीप आदि जलाएं। वहीं पूजन करते हुए, शुद्ध मन और समर्पण भाव से इन मंत्रों का उच्चारण ज़रूर करें-
> ***कश्यपोत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोथ गौतमः***॥
> ***जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः***॥
> ***दहन्तु पापं सर्व गृह्नन्त्वर्ध्यं नमो नमः***॥
अंत में आप सप्त ऋषियों से अपनी गलतियों की क्षमा मांग लें, इस प्रकार आपकी पूजा विधिपूर्वक संपन्न हो जाएगी।
हम आशा करते हैं कि इस पूजा से आपको सप्त ऋषियों का आशीर्वाद मिलेगा और आपको ज्ञान की प्राप्ति होगी। ऐसी ही धर्म संबंधित जानकारियों के लिए आप श्री मंदिर पर बने रहें।