<style> footer { visibility: hidden; } img { display: block; margin-left: auto; margin-right: auto; } body > .ui-infobar, body > .ui-toc, body > .ui-affix-toc { display: none !important; } body::-webkit-scrollbar { width: 0 !important } body { overflow: -moz-scrollbars-none; } body { -ms-overflow-style: none; } .markdown-body { font-family: "Kohinoor Devnagiri"; text-align:justify; font-size:1.3em; padding-top:0.2em; } .markdown-body h1 { font-size:1.7em; } .markdown-body h2 { padding-top:1em; font-size:1.5em; border-top: 1px solid #eee; border-bottom: 1px solid #fff; } .markdown-body h3 { font-size:1.3em; } #doc.comment-enabled.comment-inner{ margin-right:0px; } .video-container { overflow: hidden; position: relative; width:100%; } .video-container::after { padding-top: 56.25%; display: block; content: ''; } .video-container iframe { position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; } </style> # संतान सप्तमी की विशेष पूजा विधि हर विवाहित महिला की यह कामना होती है कि उसे संतान की प्राप्ति हो और अगर उसकी संतान है तो वह हमेशा स्वस्थ और सुखी रहे। इसी कामना की पूर्ति के लिए संतान सप्तमी का व्रत महिलाओं द्वारा विधिपूर्वक रखा जाता है। **आज हम इस महत्वपूर्ण व्रत की संपूर्ण पूजा विधि आपके लिए लेकर आए हैं-** आपको बता दें, यह व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित होता है। संतान सप्तमी के व्रत-पालन का सबसे प्रथम चरण है, इसका संकल्प। यदि आप व्रती हैं, तो आप इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर, अपनी नित्य क्रियाओं से निवृत्त हो लें। इसके तत्पश्चात, आप स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें और सच्चे मन से इस व्रत का संकल्प लें। **पूजा से पहले-** * भक्त काली मिट्टी से भगवान गणेश, भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतीकात्मक प्रतिमा बना लें। * संपूर्ण पूजा सामग्री एकत्रित कर लें। * इस पूजा में दूर्वा, जनेऊ अक्षत, मौली, बिल्वपत्र, पुष्प, चंदन, रोली, घी का दीपक, धूप, पुष्प, पुष्प माला, सुहाग की सामग्री, भोग, पंचामृत और गंगाजल की आवश्यकता होती है। **अब पूजा विधि शुरू करें-** * इसके लिए भक्तजन पूजा स्थल को हल्दी या गोबर से लीप लें और उसपर चौक या रंगोली बना लें। * इसके बाद यहां पर चौकी रखें और उसपर पीला कपड़ा बिछाएं। * इसपर भगवान गणेश, भगवान शिव और देवी पार्वती की मूर्तियों को स्थापित करें। * अगर आप मिट्टी से मूर्ति नहीं बना पाएं हैं तो जो भी प्रतिमा या चित्र उपलब्ध हो उसका उपयोग करें। **प्रतिमाओं को स्थापित करने के बाद-** * घी का दीप प्रज्वलित करें। * इसके बाद तीनों प्रतिमाओं पर दूर्वा से, **1.** पहले पंचामृत **2.** फिर गंगाजल और **3.** अंत में शुद्ध जल छिड़कें। * इसके बाद प्रतिमाओं को चंदन और कुमकुम का तिलक लगाएं। * अब तीनों प्रतिमाओं को मौली अर्पित। * इसके बाद भगवान गणेश जी और भगवान शिव जी को जनेऊ अर्पित करें। अब पूजा विधि को आगे बढ़ाते हुए, * प्रतिमाओं को अक्षत, पुष्प, पुष्प माला, भोग, फल आदि चढ़ाएं। * भगवान शिव जी को बिल्वपत्र ज़रूर चढ़ाएं और माता पार्वती को सुहाग सामग्री अवश्य अर्पित करें। आपको बता दें, कई जगहों पर चांदी के कड़े या छल्ले की भी पूजा की जाती है। जो लोग चांदी का कड़ा नहीं ला सकते, वह मौली में 7 गांठें लगाकर, उसकी पूजा करते हैं। संतान सप्तमी में भोग का विशेष महत्व है, इस पूजा में मालपुए, पुए, खीर और पूड़ी का भोग लगाया जाता है। व्रत कथा के बिना यह पूजा अधूरी है, इसलिए पूजा के दौरान व्रत कथा को ज़रूर सुनें। अंत में भगवान जी की आरती उतारें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा-याचना करें। इस प्रकार आपकी पूजा संपन्न होती है। पूजा के बाद स्त्रियां विधि-पूर्वक व्रत का पालन अवश्य करें। तो यह थी संतान सप्तमी की संपूर्ण पूजा विधि। हम आशा करते हैं कि इस व्रत के पालन से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हों।