<style>
footer {
visibility: hidden;
}
img {
display: block;
margin-left: auto;
margin-right: auto;
}
body > .ui-infobar, body > .ui-toc, body > .ui-affix-toc {
display: none !important;
}
body::-webkit-scrollbar { width: 0 !important }
body { overflow: -moz-scrollbars-none; }
body { -ms-overflow-style: none; }
.markdown-body {
font-family: "Kohinoor Devnagiri";
text-align:justify;
font-size:1.3em;
padding-top:0.2em;
}
.markdown-body h1 {
font-size:1.7em;
}
.markdown-body h2 {
padding-top:1em;
font-size:1.5em;
border-top: 1px solid #eee;
border-bottom: 1px solid #fff;
}
.markdown-body h3 {
font-size:1.3em;
}
#doc.comment-enabled.comment-inner{
margin-right:0px;
}
.video-container {
overflow: hidden;
position: relative;
width:100%;
}
.video-container::after {
padding-top: 56.25%;
display: block;
content: '';
}
.video-container iframe {
position: absolute;
top: 0;
left: 0;
width: 100%;
height: 100%;
}
</style>
# स्कंद षष्ठी की पवित्र व्रत कथा
श्री मंदिर पर आपका स्वागत है। प्रिय साथियों आज हम आपको स्कन्द षष्ठी की व्रत कथा के बारे में बताएंगे। कुमार कार्तिकेय के जन्म का वर्णन हमें पुराणों में ही मिलता है।
जब देवलोक में असुरों ने आतंक मचाया हुआ था, तब देवताओं को पराजय का सामना करना पड़ा था। लगातार हो रहे राक्षसों के आतंक से सभी देवतागण परेशान थे। ऐसे में देवताओं ने भगवान ब्रह्मा से मदद की गुहार मांगी। देवताओं ने अपनी समस्या का पूरा वृतांत ब्रह्मा जी को बताया। जिसपर ब्रह्मा जी ने कहा कि भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही इन असुरों का नाश होगा, लेकिन उस काल चक्र में माता सती के वियोग में भगवान शिव समाधि में लीन थे।
ऐसे में इंद्र और सभी देवताओं ने भगवान शिव को समाधि से जगाने के लिए भगवान कामदेव की मदद मांगी। जिसके बाद कामदेव ने खुद भस्म होकर भगवान भोलेनाथ की तपस्या को भंग कर दिया। और फिर आखिरकार भगवान शिव ने माता पार्वती से विवाह किया। विवाह के बाद वो दोनों देवदारु वन में एकांतवास के लिए चले गए।
उस वक्त भगवान शिव और माता पार्वती एक गुफा में निवास कर रहे थे। उस वक्त एक कबूतर गुफा में चला गया और उसने भगवान शिव के वीर्य का पान कर लिया परंतु वह इसे सहन नहीं कर पाया और भागीरथी को सौंप दिया। गंगा की लहरों के कारण वीर्य 6 भागों में विभक्त हो गया और इससे 6 बालकों का जन्म हुआ। यह 6 बालक मिलकर 6 सिर वाले बालक बन गए। इस प्रकार कार्तिकेय का जन्म हुआ।
तो ये थी स्कन्द षष्ठी की व्रत कथा के बारे में संपूर्ण जानकारी। हम आशा करते हैं कि आपको ये वीडियो पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य व्रत कथा जानने के लिए जुड़े रहें श्री मंदिर के साथ।