<style> footer { visibility: hidden; } img { display: block; margin-left: auto; margin-right: auto; } body > .ui-infobar, body > .ui-toc, body > .ui-affix-toc { display: none !important; } body::-webkit-scrollbar { width: 0 !important } body { overflow: -moz-scrollbars-none; } body { -ms-overflow-style: none; } .markdown-body { font-family: "Kohinoor Devnagiri"; text-align:justify; font-size:1.3em; padding-top:0.2em; } .markdown-body h1 { font-size:1.7em; } .markdown-body h2 { padding-top:1em; font-size:1.5em; border-top: 1px solid #eee; border-bottom: 1px solid #fff; } .markdown-body h3 { font-size:1.3em; } #doc.comment-enabled.comment-inner{ margin-right:0px; } .video-container { overflow: hidden; position: relative; width:100%; } .video-container::after { padding-top: 56.25%; display: block; content: ''; } .video-container iframe { position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; } </style> # जानें कब अवतरित होंगे भगवान कल्कि! ![]( https://srm-cdn.a4b.io/images/orig/WBds5dezw6Idx56g0OshpxSvmxVR8RsJ.jpg?w=1080&h=1080) श्रीमद्भागवत गीता में कहा गया है कि जब संसार में धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ने लगता है, तब भगवान विष्णु स्वयं धर्म की स्थापना हेतु, धरती पर जन्म लेते हैं और पापों का विनाश कर सृष्टि का कल्याण करते हैं। सतयुग से लेकर द्वापर युग तक, भगवान विष्णु के अब तक नौ अवतार धरती पर अवतरित हो चुके हैं। पुराणों में कलियुग को सभी युगों में सबसे निकृष्ट माना गया है, क्योंकि इस युग में पाप, लोभ, अनैतिकता, अधर्म सभी अपने चरम पर होगा। बात कल्कि अवतार की करें, तो यह आज भी लोगों के लिए एक रहस्य के समान है। ऐसे में हर कोई यह जानना चाहता है, कि भगवान विष्णु अपना यह अवतार कब और कहां लेंगे और उनका रूप कैसा होगा? हालांकि, इस तरह के सभी सवालों के जवाब श्रीमद्भागवत गीता में पहले से मौजूद है, जिनसे आज हम आपको अवगत कराएंगे। **कब लेंगे कल्कि अवतार जन्म** ![]( https://srm-cdn.a4b.io/images/orig/rbxSHIEgjkdwfLDSF4p5bK65luhXg1cX.jpg?w=1080&h=1080) श्रीमद्भागवत-महापुराण के अनुसार, जब कलयुग में पाप और अधर्म, अपनी चरम सीमा पर होगा, तब भगवान विष्णु कल्कि अवतार लेकर कलयुग का अंत करेंगे। कल्कि पुराण के अनुसार, कल्कि भगवान का जन्‍म सावन मास के शुक्‍ल पक्ष की संध्या व्यापिनी तिथि में होगा। श्रीमदभागवत के 12वें स्कन्ध, द्वितीय अध्याय में, भगवान कल्कि के अवतार का उल्लेख करते हुए, बताया गया है कि जब चंद्रमा, सूर्य और देवगुरु बृहस्पति एक साथ यानी एक ही दिन, एक ही समय पर साथ-साथ पुष्य नक्षत्र कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, तब भगवान कल्कि अवतरित होंगे। **कहां लेंगे कल्कि अवतार जन्म** ऐसा पुराणों में निहित है, कि कलियुग में लोग धर्म का अनुसरण करना बन्द कर देंगे। तब सम्भल नगरी में, विष्णु यश नामक श्रेष्ठ ब्राह्मण के पुत्र के रूप में भगवान कल्कि का जन्म होगा। यह अवतार, अपने हाथ में चमचमाती हुई तलवार के साथ, देवदत्त नाम के सफेद घोड़े पर सवार होकर, दुष्टों का संहार करेंगे और इसी के बाद से सतयुग की शुरुआत होगी। तो यह थी, कल्कि अवतार के प्राकट्य से जुड़ी जानकारी। अगर आपको यह जानकारी अच्छी लगी, तो ऐसी और भी धर्म संबन्धित रहस्यों को जानने के लिए बने रहिये श्रीमंदिर के साथ।