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# मासिक दुर्गाष्टमी की पूजा विधि
नमस्कार, क्या आप एक ऐसी पूजा विधि के बारे में जानते हैं? जिसके करने से ही मनुष्य को उसकी तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलती है, साथ ही सुख शांति और समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। इसके अलावा भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है? अगर नहीं, तो ये लेख अंत तक अवश्य पढ़ें, दरअसल हम बात कर रहे हैं दुर्गाष्टमी के दिन मॉं दुर्गा की आराधना की।
मान्यता है कि दुर्गाष्टमी के दिन विधि विधान से पूजा अर्चना करने से मॉं दुर्गा अपने भक्तों के हर संकट से उनकी रक्षा करती हैं साथ ही उन्हें धन-वैभव, ऐश्वर्य और संपन्नता भी प्रदान करती हैं। कहा जाता है देवी देवताओं की पूजा भी तभी फलीभूत होती है, जब उसे पूर्ण विधि-विधान से दोषरहित तरीके से किया जाए।
**इसलिए आइए विस्तार से जानते हैं दुर्गाष्टमी के दिन मॉं दुर्गा की संपूर्ण पूजा विधि के बारे में।**
* इस दिन प्रातः उठकर दैनिक क्रिया से निवृत्त होने के बाद स्नान कर लाल रंग के साफ वस्त्र धारण कर लें।
* इसके बाद तांबे के पात्र में लाल रंग का तिलक लगाएं और सूर्यदेव को अर्घ्य दें।
* फिर घर की साफ-सफाई करके पूजा स्थान और घर में गंगाजल का छिड़काव करें।
* अब एक लकड़ी का साफ पाटा या चौकी लेकर उसपर लाल वस्त्र बिछाएं।
* चौकी को गंगाजल से शुद्ध करें और माँ दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें।
* अब मां की मूर्ति पर लाल रंग का पुष्प चढ़ाकर धूप और दीप जलाएं।
इसके साथ ही मां को 16 श्रृंगार का सामान भी चढ़ाएं। फिर फल और मिठाई अर्पित करने के बाद मॉं दुर्गा की आरती उतारें। अब मॉं दुर्गा की ज्योति जलाकर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसके अलावा इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है।
इसलिए दुर्गाष्टमी के दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें।ध्यान रहें मां को चढ़ाए गए 16 श्रृंगार का सामान किसी सुहागन या नवदुर्गा के मंदिर में किसी को दान कर दें। मान्यता है कि ऐसा करने से भक्तों के घर में सुख शांति की प्राप्ति होती है।
तो श्री मंदिर के इस लेख में आपने जाना कि दुर्गाष्टमी के दिन मॉं दुर्गा का पूजन कैसे करें। इसके अलावा अगर आप मॉं दुर्गा की व्रत कथा सुनन या पढ़ना चाहते हैं तो उससे संबंधित जानकारी आप श्री मंदिर के ऐप पर जाकर देख सकते हैं। हम आशा करते हैं आपकी पूजा और व्रत फलीभूत हो।