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# स्कंद षष्ठी की पूजा विधि
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार स्कंद षष्ठी का दिन भगवान कार्तिकेय को अधिक प्रिय है, इसलिए इस शुभ दिन पर उनकी आराधना की जाती है। मान्यता है कि स्कंद षष्ठी के दिन विधि विधान से पूजा करने से मनुष्य को ग्रह बाधा से मुक्ति मिलती है साथ ही जीवन की तमाम समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
इसके अलावा जो लोग भगवान कार्तिकेय का आशीष प्राप्त करने के लिए पूरे समर्पण और आस्था के साथ इस व्रत का पालन करते हैं। उन्हें जीवन में सुख और वैभव की प्राप्ति होती है। ये भी कहा जाता है कि स्कंद षष्ठी के व्रत का पालन करने से पुत्र प्राप्ति की इच्छा भी पूर्ण होती है।
**आज इस लेख के माध्यम से हम आपको स्कंद षष्ठी की व्रत से जुड़ी हुई संपूर्ण पूजा विधि के बारे में बताएंगे, जिससे आप पूरे विधि-विधान से इस पूजा व व्रत का पालन कर सकें।**
* स्कंद षष्ठी के दिन प्रातः जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई करें और स्वयं भी स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण कर लें।
* इसके बाद भगवान के व्रत का संकल्प करें।
* फिर पूजा स्थान पर ही भगवान कार्तिकेय के साथ मां गौरी और शिव जी की प्रतिमा स्थापित करें।
* अब भगवान के समक्ष दीप, धूप जलाएं और उनका तिलक करें।
* इस पूजा में आपको कलावा, अक्षत, हल्दी, चंदन, गाय का घी, दूध, मौसमी फल, फूल आदि चीजें भगवान को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
* लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि शिव जी को हल्दी न चढ़ाएं।
* पूजा के बाद आरती और भजन कीर्तन करें।
* शाम को पुनः पूजा करने के पश्चात फलाहार करें।
तो ये थी स्कन्द षष्ठी की पूजा विधि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी,अगर आप स्कन्द षष्ठी की व्रत कथा के बारे में जानना चाहते हैं तो श्री मंदिर के ऐप पर इससे संबंधित वीडियो देख सकते हैं।