<style> footer { visibility: hidden; } img { display: block; margin-left: auto; margin-right: auto; } body > .ui-infobar, body > .ui-toc, body > .ui-affix-toc { display: none !important; } body::-webkit-scrollbar { width: 0 !important } body { overflow: -moz-scrollbars-none; } body { -ms-overflow-style: none; } .markdown-body { font-family: "Kohinoor Devnagiri"; text-align:justify; font-size:1.3em; padding-top:0.2em; } .markdown-body h1 { font-size:1.7em; } .markdown-body h2 { padding-top:1em; font-size:1.5em; border-top: 1px solid #eee; border-bottom: 1px solid #fff; } .markdown-body h3 { font-size:1.3em; } #doc.comment-enabled.comment-inner{ margin-right:0px; } .video-container { overflow: hidden; position: relative; width:100%; } .video-container::after { padding-top: 56.25%; display: block; content: ''; } .video-container iframe { position: absolute; top: 0; left: 0; width: 100%; height: 100%; } </style> # संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त एवं महत्व इस लेख को पढ़ने वाले सभी दर्शकों पर श्री गणेश की कृपा सदैव बनी रहे, इस कामना के साथ आज हम आपको संकटों को हरने वाली संकष्टी चतुर्थी के महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं। साथ ही हम आपको यह भी बताएंगे कि इस दिन को अधिक मंगलमय बनाने के लिए आपको क्या करना चाहिए और किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मनुष्य अपने जीवनकाल के दौरान कई परेशानियों और संकटों का सामना करता है। भगवान के प्रति हमारी आस्था और हमारा समर्पण ही हमें इन समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। संकष्टी चतुर्थी के व्रत को भी संकट हरने वाला व्रत माना गया है, इसलिए भक्तों के बीच इस व्रत का विशेष महत्व है। भगवान गणेश जी को प्रसन्न करने के लिए भी संकष्टी चतुर्थी के दिन को शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के दिन विघ्नहर्ता गणेश जी का पूजन करने से व्यक्ति की सभी परेशानियां और बाधाएं दूर हो जाती हैं। साथ ही भगवान गणेश की पूजा अर्चना से यश, धन, वैभव और अच्छी सेहत की भी प्राप्ति होती है। आपको बता दें हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह में दो चतुर्थी तिथि आती हैं। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। हर माह में आने वाली चतुर्थी का अपना अलग महत्व होता है। **शुभ मुहूर्त:** **तिथि प्रारम्भ-** 11 दिसंबर को, शाम 04:14 PM से **तिथि समाप्त -** 12 दिसंबर को, शाम 06:48 PM तक **संकष्टी के दिन चन्द्रोदय का समय :** 11 दिसंबर, 08:36 PM **आइए, अब जानते हैं संकष्टी चतुर्थी के दिन किन कार्यों को करना शुभ माना जाता है और इस दिन किन कार्यों को करने से व्यक्ति को बचना चाहिए।** * आप संकष्टी चतुर्थी के दिन **‘ॐ गं गणपतयै नम:’ मंत्र का 108 बार जाप** कर सकते हैं। * इसके अलावा इस दिन गणेश भगवान को तिल और गुड़ के लड्डुओं का भोग लगा सकते हैं। * ऐसा करना शुभ होता है। वहीं आज के दिन अगर किसी ब्राह्मण को भोजन कराया जाए, साथ ही गाय को हरी घास खिलाई जाए तो व्यक्ति की कुंडली में मौजूद ग्रह दोष भी समाप्त हो जाते हैं। * संकष्टी चतुर्थी के दिन साबुत हरी मूंग दाल का दान करने को भी लाभकारी माना गया है, इससे व्यक्ति को सद्बुद्धि मिलती है। * साथ ही आप संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश भगवान की पूजा करते समय हरे रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं। * यूं तो हमें हमेशा ही सभी मनुष्यों का सम्मान करना चाहिए लेकिन विशेष कर इस दिन किन्नरों का अपमान नहीं करना चाहिए। * वहीं इस बात का भी ध्यान रखें कि इस दिन किसी भी व्यक्ति को उधार में कुछ नहीं देना चाहिए। * कहा जाता है कि इस दिन उधार लेन-देन करने से संचित धन में कमी आती है। इसके अलावा इस दिन किसी भी पशु को न तो मारें और ना ही उसे तंग करें साथ ही इसका भी ध्यान रखें कि किसी के साथ कटु शब्दों का प्रयोग ना करें।