<style>
footer {
visibility: hidden;
}
img {
display: block;
margin-left: auto;
margin-right: auto;
}
body > .ui-infobar, body > .ui-toc, body > .ui-affix-toc {
display: none !important;
}
body::-webkit-scrollbar { width: 0 !important }
body { overflow: -moz-scrollbars-none; }
body { -ms-overflow-style: none; }
.markdown-body {
font-family: "Kohinoor Devnagiri";
text-align:justify;
font-size:1.3em;
padding-top:0.2em;
}
.markdown-body h1 {
font-size:1.7em;
}
.markdown-body h2 {
padding-top:1em;
font-size:1.5em;
border-top: 1px solid #eee;
border-bottom: 1px solid #fff;
}
.markdown-body h3 {
font-size:1.3em;
}
#doc.comment-enabled.comment-inner{
margin-right:0px;
}
.video-container {
overflow: hidden;
position: relative;
width:100%;
}
.video-container::after {
padding-top: 56.25%;
display: block;
content: '';
}
.video-container iframe {
position: absolute;
top: 0;
left: 0;
width: 100%;
height: 100%;
}
</style>
# ऋषि पंचमी का शुभ मुहूर्त, महत्व और इस पूजा के लाभ

हमारे हिंदू धर्म में ऋषि मुनियों को विशेष स्थान दिया गया है, क्योंकि इन साधकों ने अपने ज्ञान से सदैव ही समाज का कल्याण किया है। भाद्रपद माह में मनाएं जाने वाले पर्वों में ऋषि पंचमी का त्यौहार सप्त ऋषियों को समर्पित होता है। आज हम इस त्यौहार के महत्व के बारे में विस्तार से बात करेंगे और यह भी जानेंगे कि इस व्रत को करने से आपको क्या लाभ होंगे।
**चलिए सबसे पहले बात कर लेते हैं ऋषि पंचमी की तिथि और मुहूर्त -**
**ऋषि पंचमी की तिथ:**
ऋषि पंचमी का व्रत, गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद रखा किया जाता है। इस वर्ष यह व्रत 1 सितंबर, गुरुवार को रखा जाएगा।
पंचमी तिथि की शुरुआत - 31 अगस्त को दोपहर 03:22 बजे से हो रही है।
पंचमी तिथि का समापन - 01 सितंबर, 2022 को दोपहर 02:49 बजे पर होगा।
पूजन की शुभ मुहूर्त - 01 सितंबर को सुबह 11:05 बजे से लेकर दोपहर 01:37 बजे तक का है।
**ऋषि पंचमी मुहूर्त:**
* ब्रह्म मुहूर्त - 1 सितंबर, सुबह 04:29 बजे से 05:14 बजे तक।
* रवि योग - 1 सितंबर, सुबह 05:58 बजे से दोपहर 12:12 बजे तक।
* अभिजित मुहूर्त - 1 सितंबर, सुबह 11:55 बजे से 12:46 बजे तक।
* विजय मुहूर्त - 1 सितंबर, दोपहर बाद 02:28 बजे से 03:19 बजे तक।
यह तो हुई ऋषि पंचमी व्रत के शुभ मुहूर्त की बात, अब इस व्रत के महत्व के बारे में जान लेते हैं। इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है, जिससे उनकी विशेष कृपा भक्तों पर बनी रहें।
**इन सप्त ऋषियों के नाम कुछ इस प्रकार हैं:**
* ऋषि: कश्यप
* ऋषि: अत्रि
* ऋषि: भारद्वाज
* ऋषि: विश्वामित्र
* ऋषि: गौतम
* ऋषि: जमदग्नि
* ऋषि: वशिष्ठ
महिलाओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है, कि विवाहित महिलाओं को इस व्रत के पालन से, मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। मान्यता यह भी है कि इस व्रत से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान जाने-अंजाने में की गईं गलतियों से भी छुटकारा मिल जाता है।
इतना ही नहीं, यह व्रत ऋषियों के प्रति श्रद्धा, समर्पण और सम्मान की भावना को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण आधार बनता है।

**ऋषि पंचमी व्रत के लाभ -**
ऋषि पंचमी के व्रत और इस दिन पूजा करने के अनन्य लाभ होते हैं। अपना ऋषि ऋण चुकाने के लिए, जो भी व्यक्ति निष्ठा से सप्त ऋषियों की पूजा करता है, उसके सारे पाप धुल जाते हैं। ऋषि पंचमी के व्रत का पालन करने के पश्चात गंगा में स्नान करते हुए, ऋषियों को अर्घ्य देने से, मनुष्य की आत्मा का शुद्धिकरण हो जाता है। मान्यता यह भी है कि इस व्रत के पालन से व्रती को धन-धान्य, सौभाग्य व संतान की प्राप्ति होती है।
**इन बातों का ज़रूर रखें ध्यान -**
ऋषि पंचमी के व्रत में, कई स्थानों पर हल की मदद से पैदा होने वाले अनाज को नहीं खाया जाता और गाय के दूध का प्रयोग भी पूरी तरह वर्जित है।
तो यह थी ऋषि पंचमी की महत्वपूर्ण जानकारी, आशा करते हैं कि आप पर भी सप्त ऋषियों का आशीर्वाद आप पर भी बना रहे और आपको हमेशा जीवन में अच्छा मार्गदर्शन मिले।