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# कैसे करें कल्कि द्वादशी पर पूजन

हिंदू धर्म में भाद्रपद के महीने को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है, क्योंकि यह महीना कई पर्वों और व्रतों का संगम है। इसी माह में कल्कि द्वादशी का महत्वपूर्ण पर्व भी मनाया जाता है, जो कि भगवान विष्णु के कल्कि अवतार को समर्पित है।
क्या आपको पता है कि कल्कि द्वादशी किस तिथि को मनाई जाती है, और इस पूजा के क्या लाभ हैं? अगर नहीं, तो आइए आज हम इन तथ्यों से आपका परिचय कराते हैं।
**कल्कि द्वादशी की शुभ तिथि:**
कल्कि द्वादशी की पूजा, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को की जाती है। इस वर्ष यह पर्व 07 सितंबर, 2022, दिन बुधवार को मनाया जाएगा।
कल्कि द्वादशी की पूजा के दिन, भक्त भगवान विष्णु के कल्कि अवतार की अर्चना कर, उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं, और अपने द्वारा किए हुए पापों की क्षमा मांगते हैं। लोग बहुत ही, श्रद्धा भाव से उपवास करते हैं, ताकि उनका अंत समय पीड़ा रहित हो।
**कल्कि द्वादशी की पूजा विधि:**

कल्कि द्वादशी के दिन, सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद भगवान सूर्य को गंगाजल अर्पित करें। तत्पश्चात् मंदिर में चौकी स्थापित करें, उसपर भगवान विष्णु की मूर्ति विराजित करें, और उनके समक्ष कलश को भी स्थापित करें। कलश की स्थापना के पश्चात, भगवान जी की प्रतिमा पर गंगाजल छिड़कें और उन्हें तिलक लगाएं।
इसके बाद आप भगवान जी को अक्षत, रोली, मौली, धूप, दीप, पुष्प, पुष्प माला, फल, भोग समेत संपूर्ण पूजन सामग्री अर्पित करें। पूजा के दौरान भक्तजन विष्णु स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। पूजा के अंत में भगवान जी की श्रद्धापूर्वक आरती उतारें और अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगे।
व्रत रखने वाले भक्त पूरा दिन व्रत का पालन करें। आपको बता दें, यह व्रत द्वादशी से एक दिन पूर्व, एकादशी से आरंभ हो कर, त्रयोदशी तक रखा जाता है। लोग अपनी क्षमता अनुसार इस दौरान, फलाहार ग्रहण कर सकते हैं।
**कल्कि द्वादशी की पूजा के लाभ:**
कल्कि द्वादशी की पूजा के अनेक लाभ हैं। यह व्रत मनुष्य को सुखद और शांत जीवन प्रदान करने वाला है, तथा उनके द्वारा किए हुए पापों से मोक्ष दान करने वाला भी। तभी तो सच्चे हृदय से, इस दिन व्रत, पूजा करने से मनुष्य को इसके उत्तम फल की प्राप्ति होती है।
तो यह थी, कल्कि द्वादशी की पूजा से जुड़ी विस्तृत जानकारी। ऐसी और भी जानकारियों से अवगत होने के लिए, बने रहिए श्रीमंदिर के साथ।